ओडीओपी की सफलता के बाद अब पारंपरिक कौशल संरक्षण पर ध्यान देना आवश्यक
मुरादाबाद, 2 नवंबर। न्यूज़18 उत्तर प्रदेश/उत्तराखंड द्वारा आयोजित ‘यूपी कमिश्नरीज़ कनेक्ट – मुरादाबाद’ कार्यक्रम में आमंत्रित वक्ता के रूप में शामिल हुए यंग एंटरप्रेन्योर्स सोसाइटी (YES) के चेयरमैन श्री जे.पी. सिंह ने प्रदेश के औद्योगिक विकास, निर्यात कारोबार, लॉजिस्टिक्स, पैकेजिंग, कानून एवं नियामकीय व्यवस्थाओं तथा पारंपरिक हस्तशिल्प कौशल के संरक्षण से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर अपने विचार रखे।
कार्यक्रम के दौरान पूछे गए प्रश्नों का उत्तर देते हुए श्री सिंह ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में परिवहन एवं लॉजिस्टिक्स सुविधाओं में उल्लेखनीय सुधार हुआ है, जिससे औद्योगिक गतिविधियों और निर्यात कारोबार को बेहतर आधार मिला है। उन्होंने पैकेजिंग, उद्योग से संबंधित कानूनी एवं नियामकीय विषयों तथा निर्यातकों के समक्ष आने वाली व्यावहारिक चुनौतियों पर भी अपने विचार साझा किए। हालांकि, उनकी चर्चा का प्रमुख केंद्र पारंपरिक कारीगरों का कौशल विकास और उसका संरक्षण रहा।
उन्होंने उत्तर प्रदेश सरकार की ‘ एक जनपद–एक उत्पाद’ (ओडीओपी) योजना की सराहना करते हुए कहा कि इस पहल ने मुरादाबाद के हस्तशिल्प उद्योग को नई पहचान और वैश्विक बाजार में बेहतर अवसर प्रदान किए हैं। अब आवश्यकता है कि ओडीओपी की सफलता को आगे बढ़ाते हुए ‘ एक जनपद–एक कौशल’ की अवधारणा के अंतर्गत पारंपरिक कौशल के संरक्षण को भी प्राथमिकता दी जाए।
श्री सिंह ने कहा कि मुरादाबाद की वास्तविक पहचान केवल उसके उत्पादों से नहीं, बल्कि उन कुशल कारीगरों से है, जिनकी कला और तकनीक पीढ़ी-दर-पीढ़ी हस्तांतरित होती आई है। बदलती परिस्थितियों और युवा पीढ़ी की पारंपरिक व्यवसायों में घटती रुचि के कारण यह अमूल्य विरासत धीरे-धीरे संकट में पड़ रही है।
उन्होंने कहा, “एक मशीन दोबारा खरीदी जा सकती है, एक कारखाना दोबारा बनाया जा सकता है, लेकिन यदि किसी कारीगर का पीढ़ियों से अर्जित हुनर समाप्त हो गया, तो उसे दोबारा पैदा करना लगभग असंभव होगा।”
उन्होंने सुझाव दिया कि अनुभवी मास्टर कारीगरों के ज्ञान और तकनीकों का व्यवस्थित दस्तावेजीकरण किया जाए तथा उन्हें नई पीढ़ी को प्रशिक्षित करने की प्रक्रिया से जोड़ा जाए, ताकि पारंपरिक कौशल के संरक्षण के साथ युवाओं के लिए रोजगार और उद्यमिता के नए अवसर भी विकसित हों।
श्री सिंह ने कहा कि ओडीओपी की दीर्घकालिक सफलता केवल उत्पादों के प्रोत्साहन में नहीं, बल्कि उन्हें बनाने वाले हाथों के हुनर को सुरक्षित रखने में है। उन्होंने ‘एक उत्पाद–एक कौशल–एक वैश्विक पहचान’ की अवधारणा को भविष्य की औद्योगिक प्रगति का महत्वपूर्ण आधार बताया।

02Nov

